विपरीत नौकासन

विपरीत नौकासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Steps, Instruction and Benefits of Viprit Naukasana in hindi

viprit naukasana in hindi

विपरीत नौकासन के बारे में – About Viprit naukasana in hindi

विपरीत नौकासन तीन(विपरीत + नौका + आसन) शब्दों से मिलकर बना है , जहाँ ‘विपरीत’ का अर्थ उल्टा, ‘नौका’ का अर्थ नाव और ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा से है। इस आसन को करते समय आपके शरीर का आकर उलटे नाव की तरह होता है इसलिए इसे विपरीत नौकासन कहते है।

विपरीत नौकासन करने से पहले यह आसन करें – Do these asana before Viprit Naukasana in hindi

विपरीत नौकासन करने से पहले नीचे दिए गए निम्न योग आसनों को करने की सलाह दी जाती है। इन आसनो को करने से आपके रीढ़ में लचीलापन आता है, तथा आपके पीठ, पेट एवं हाथो के मांसपेशियों का तापमान बढ़ता है और उन्हें मजबूत बनाता है , जिससे आपको विपरीत नौकासन करने में आसानी होगी।

  1. उष्ट्रासन
  2. पश्चिमोत्तानासन
  3. शलभासन
  4. भुजंगासन।

विपरीत नौकासन करने की विधि – Steps of  Viprit Naukasana in hindi

विपरीत नौकासन करने की विधि नीचे दी गयी है, जिसे ध्यानपूर्वक करने से पहले पढ़ें। इससे आपको विपरीत नौकासन करते समय आसानी होगी।यह आसन पेट के बल लेट कर किया जाता है।

चरण 1- सर्वप्रथम जमीन पर पेट के बल लेट जाएं, अपने दोनों पैरों को एकसाथ रखें इस स्थिति में पैर के पंजे आसमान ओर होना चाहिए। अपने हाथों को अपने आगे फैलायें हथेलियां जमीन की ओर रखें।

चरण 2- साँस लेते हुए अपने ऊपर के धड़ (छाती तक) को एवं शरीर के निचले हिस्से(कूल्हे तक) को ऊपर उठाएं।

चरण 3- इस स्थिति में आपका शरीर नाव की तरह होगा इसलिए पुरे शरीर का भार पेट पर होता है, सामान्य साँस ले और 10 से 20 सेकेण्ड या क्षमता अनुसार इस मुद्रा में रहें।

चरण 4-साँस छोड़ते हुए अपने शरीर को जमीन पर रखें और मकरासन की मुद्रा में आराम करें।

इस आसन को करते समय जितना शरीर उठा सकते है उतना ही उठायें अपने शरीर के साथ जबरदस्ती न करें, यह आसन कई अंगो को प्रभावित करता है इसलिए क्षमता से अधिक करने पर आपके शरीर के आतंरिक अंगो पर दुष्प्रभाव पड़ सकते है।

विपरीत नौकासन करते समय ध्यान दें – Pay Attention when doing Viprit Naukasana

विपरीत नौकासन करते समय आपको नीचे दिए गए निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

  1. ध्यान दे यह आसन करते समय आपके शरीर का भार पेट पर हो।
  2. विपरीत नौकासन करते समय अपने पैर को घुटने से न मुड़ने दें।

विपरीत नौकासन के फायदे – Benefits Viprit Naukasana in hindi

विपरीत नौकासन के अनेक फायदे जो नीचे निम्नलिखित दिए गए हैं , मोटापा कम करता है और यह आपके शरीर के कई अंगो को प्रभावित करता है।

  1. कमर एवं डिस्क जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
  2. यह आसन सिर दर्द की बीमारी को भी कम करता है।
  3. रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है।
  4. विपरीत नौकासन करने से पेट की चर्बी घटती है।
  5. यह आसन शरीर के आलस को कम करता है और फुर्तीला बनता है।

यह भी पढ़ें: त्रिकोणासन करने की विधि।

विपरीत नौकासन के लिए प्रतिबंध – Restrictions for Viprit Naukasana in hindi

नीचे बीमारियों की सूची दी गई है, जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें विपरीत नौकासन नहीं करना चाहिए।

  1. यदि आपको उच्च रक्तचाप की समस्या हो तो यह आसन न करें।
  2. गर्भावस्था के दौरान इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  3. हर्निया या अल्सर हो तो कृपया यह आसन न करें।
  4. पेट या पीठ में चोट एवं अधिक दर्द हो विपरीत नौकासन को नहीं करना चाहिए।

विपरीत नौकासन करने के बाद यह आसन करें – Do these asana after Viprit naukasana in hindi

  1. मकरासन
  2. धनुरासन
  3. शशांकासन

शुरुआती लोगों के लिए विपरीत नौकासन करने का सर्वश्रेष्ठ सुझाव – Best suggested tips, Viprit Naukasana for beginners

यदि आप योगा नियमित नहीं करते हैं तो, आपके शरीर में लचीलापन और शक्ति नहीं रहता है , कई ऐसे आसन होते है जिन्हे करने में आपको तकलीफ महसूस हो सकती है। शुरुआती दौर में इसलिए आपको सरल तरीके से आसन करना चाहिए , इससे आपको सहजता महसूस होगी क्यूँकि अधिक जोर देने से आपके शरीर में दर्द हो सकता है।

  1. पेट के बल जमीन पर लेट जाएँ।
  2. अपने हाथों को सामने फैला ले।
  3. पैरों को इस तरह सीधा रखें की पंजे आसमान की ओर खुले हो।
  4. दांये हाथ को कमर पर रखें अब साँस लेते हुए अपने दांये पैर को कुल्हे से और ऊपरी धड़ एवं बाएं हाथ को क्षमता अनुसार ऊपर उठायें।
  5. साँस छोड़ते हुए अपने शरीर को जमीन पर रखें।
  6. अब यही प्रक्रिया दाएं पैर एवं बाएं हाथ को ऊपर उठा कर दोहराएं।

यदि आपको यह आसन करने में भी तकलीफ महसूस हो तो कृपया यह आसन न करें।जो आसन आपको सहज लगे उसे प्रतिदिन करें जब क्षमता बढ़ जाये तब कठिन आसनों को करें।

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शलभासन

शलभासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Steps, Instruction and Benefits of Salabhasana in hindi

benefits of salabhasana in hindi

शलभासन के बारे में – About Salabhasana

शलभासन एक संस्कृत शब्द है , यहाँ ‘शलभ’ का अर्थ टिड्डा या पतंगा से और ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा से है , इस आसन को करते समय आपके शरीर का आकार टिड्डे की तरह होता है इसलिए इसे शलभासन कहते है।अंग्रेजी में इसे Locust Pose कहते है।

शलभासन करने से पहले यह आसन करें – Do these asana before Salabhasana

शलभासन करने से पहले नीचे दिए गए निम्न योग आसनों को करने की सलाह दी जाती है। इन आसनो को करने से आपके शरीर में लचीलापन आता है, तथा आपके पीठ, पेट एवं हाथो के मांसपेशियों का तापमान बढ़ता है और उन्हें मजबूत बनाता है , जिससे आपको शलभासन करने में आसानी होगी।

  1. गोमुखासन
  2. भुजंगासन
  3. ऊर्ध्व मुख श्वानासन।

शलभासन करने की विधि –Salabhasana(Locust Pose) Steps

शलभासन करने की विधि नीचे दी गयी है, जिसे ध्यानपूर्वक करने से पहले पढ़ें। इससे आपको शलभासन करते समय आसानी होगी।यह आसन पेट के बल लेट कर किया जाता है।

चरण 1- सर्वप्रथम आप पेट के बल जमीन पर मकरासन की स्थिति में लेट जाएं, अब अपने दोनों पैरों को एकसाथ सटाकर रखें और अपनी ठोढ़ी को जमीन पर टिकाएं।

चरण 2- आप अपने दोनों हथेलियों की मुट्ठी बनाएं और जांघो के निचे रखें, इस स्थिति में आपकी हथेली आपकी जांघ की तरफ होनी चाहिए।

चरण 3- साँस लेते हुए अपने दोनों पैरों को बिना घुटना मोड़ें, कूल्हे(hip) के पास से जितना ऊपर उठा सकते है उतना ऊपर की ओर उठाएं, पैर के पंजे खुले आसमान की ओर दोनों पैरों को साथ रखते हुए।

चरण 4- सामान्य साँस ले और इस स्थिति को 10 सेकेण्ड या क्षमता अनुसार 30 से 40 सेकण्ड तक बनाये रखें।

चरण 5- साँस छोड़ते हुए अपने दोनों पैरों को धीरे धीरे जमीन पर रखे और अपने हाथों को जांघ के पास से निकालते हुए मकरासन की स्थिति में आराम करें।

शलभासन करते समय ध्यान दें – Pay Attention when doing Salabhasana

शलभासन करते समय आपको नीचे दिए गए निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

  1. यह आसन करते समय आपका पैर सीधा होना चाहिए।
  2. इस आसन को करते समय अपने घुटने की कटोरी को ऊपर की ओर खींचे(pull up the knee caps) और नितम्ब की मांसपेशिओं को सिकोड़ें(squeeze the buttocks)।

शलभासन के फायदे – Benefits of Salabhasana in hindi

शलभासन(benefits of salabhasana in hindi) के अनेक फायदे जो नीचे निम्नलिखित दिए गए हैं ।

  1. यह आसन साइटिका से राहत दिलाता है।
  2. यह आसन आपके पीठ की निचले हिस्से में दर्द को कम करता है।(यदि अधिक दर्द हो तो कृपया इस आसन को न करें )
  3. इस आसन को करने से आपके जांघ एवं कूल्हे की अधिक चर्बी घटती और सही आकार मिलता है।
  4. पेट की चर्बी भी इस आसन को करने से घटती है और वजन कम होता है।
  5. शलभासन करने से आपकी पाचन क्रिया ठीक रहती है।
  6. आपके किडनी को सही आकार देता है।

यह भी पढ़ें: अर्धचंद्रासन करने की विधि

शलभासन के लिए प्रतिबंध – Restrictions for Salabhasana

नीचे बीमारियों की सूची दी गई है, जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें शलभासन नहीं करना चाहिए।

  1. हृदय रोग हो तो इस आसन को न करें।
  2. गर्भावस्था के दौरान इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  3. अल्सर एवं हर्निया जैसी बीमारी हो तो इस आसन को न करें।
  4. उच्च रक्तचाप(high bp) हो तो यह आसन न करें।
  5. यदि आपको मधुमेह है तो इस आसन से बचें।

शलभासन करने के बाद यह आसन करें – Do these asana after Salabhasana

  1. नौकासन।
  2. सर्वांगासन।
  3. सेतुबंधासन।

शुरुआती लोगों के लिए शलभासन करने का सर्वश्रेष्ठ सुझाव – Best suggested tips, Salabhasana for beginners

अगर आप योगा नियमित नहीं करते हैं तो आपके शरीर के कई अंग ठीक तरह से काम नहीं करते हैं ,जिससे आपको कोई आसन करने में तकलीफ महसूस हो सकती है। इसलिए आपको सरल तरीके से आसन करना चाहिए , इससे आपको सहजता महसूस होगी। शलभासन करने से पहले आपको अर्ध शलभासन का अभ्यास करना चाहिए।

  1. जमीन पर पेट के बल लेट जाएं।
  2. अपनी हथेलियों की मुट्ठी बनाएं और जांघों के निचे उन्हें रखें।
  3. अब साँस लेते हुए अपने दाहिने पैर को ऊपर उठायें, जितना उठा सकते उतना ही उठाये यदि आपको तकलीफ महसूस हो रही है तो अपनी जांघो के निचे तकिया या कम्बल मोड़ कर रख सकते है।
  4. साँस छोड़ते हुए दाहिने पैर को निचे रखें।
  5. यही प्रक्रिया अब बांये पैर के साथ दोहराएं।

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ऊर्ध्व मुख श्वानासन

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benefits of urdhva mukha svanasana

ऊर्ध्व मुख श्वानासन के बारे में – About Urdhva Mukha Svanasana

ऊर्ध्व मुख श्वानासन चार(उर्ध्व+मुख+श्वान+आसन) शब्दों से मिलकर बना है , जहां ‘उर्ध्व’ का अर्थ ऊपर, ‘मुख’ का अर्थ चेहरा, ‘श्वान’ का अर्थ कुत्ता एवं ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा से है। अंग्रेजी में इसे Upward Facing Dog Pose कहते हैं।

ऊर्ध्व मुख श्वानासन करने से पहले यह आसन करें – Do these asana before Urdhva Mukha Svanasana

ऊर्ध्व मुख श्वानासन करने से पहले आप को निचे दिए गए निम्न आसनो को करने की सलाह दी जाती है इन आसनो को करने से आप के बाजुओ, पेट की मांसपेशियों और अपकी टाँगो के पिछले हिस्से में लचीलापन आता है, जिससे की आप को ऊर्ध्व मुख श्वानासन करने में सरलता महसूस होगी। 

  1. विपरीत नौकासन
  2. धनुरासन
  3. भुजंगासन

ऊर्ध्व मुख श्वानासन करने की विधि – Urdhva Mukha Svanasana(Upward Facing Dog Pose) Steps

ऊर्ध्व मुख श्वानासन करने की विधि नीचे दी गयी है, जिसे ध्यानपूर्वक करने से पहले पढ़ें। इससे आपको ऊर्ध्व मुख श्वानासन करते समय आसानी होगी।यह आसन पेट के बल लेट कर किया जाता है।

चरण 1- सर्वप्रथम आप पेट के बल जमीन पर लेट जाएं, अपने पैरों को एवं हाथों को सीधा रखते रखेँ। इस स्थिति में आपके पैर के पंजे ऊपर छत की ओर होना चाहिए।

चरण 2- अब अपने हाथों को कोहनी से मोड़ें और हथेलियों को अपने अपने छाती से थोड़ा नीचे जमीन पर रखें, घुटने की कटोरी को ऊपर की ओर खींचे(pull up your knee cap), ठोड़ी को जमीन में टिकाएं और सामने की ओर देखें।

चरण 3- एक गहरी लम्बी साँस अंदर भरते हुए ऊपरी धड़ को ऊपर उठायें , हथेलिओं से जमीन को बल पूर्वक दबाते हुए अपने पुरे शरीर को ऊपर उठाये। इस स्थिति में आपके शरीर का भार हथेलिओं और पैर के किनारे भाग(tip of your toe) पर होना चाहिए।

चरण 4- अपने पीठ को जितना मोड़ सकते है उतना मोड़ें, इस स्थिति में आपकी कलाई कंधे के सीध में हो। गर्दन सामान्य रूप से रखें और सामने की ओर देखें।

चरण 5-सामान्य साँस ले और इस स्थिति को 10 से 20 सेकंड तक या क्षमता अनुसार बनाये रखें।

चरण 6-साँस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने निचले शरीर को जमीन पर रखें, अब अपने ऊपरी धड़ को जमीन पर रखें और मकरासन की मुद्रा में आराम करें।

आसन को करने के लिए ऊपर दी गई तस्वीर की मदद ले सकते हैं।

ऊर्ध्व मुख श्वानासन करते समय ध्यान दें – Pay Attention when doing Urdhva Mukha Svanasana

ऊर्ध्व मुख श्वानासन करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखें।

  1. यह आसन करते समय ध्यान दें आपकी भुजाएं सीधी हो कोहनी से हाथ को न मोड़ें।
  2. जितना पीठ को पीछे मोड़ सकते ह उतना ही मोड़ें।
  3. आपके पैर की पंजे बाहर की ओर हो(ऊपर दिए गए गए तस्वीर से सहायता ले सकते हैं ) पैर की अंगुलियां अंदर की ओर न मोड़ें।

ऊर्ध्व मुख श्वानासन के फायदे – Benefits of Urdhva Mukha Svanasana

ऊर्ध्व मुख श्वानासन के अनेक फायदे(benefits of urdhva mukha svanasana) जो नीचे निम्नलिखित दिए गए हैं ।

  1. यह आसन करने से आलस और थकान कम होता है।
  2. पाचन क्रिया में सुधार लाता हैं।
  3. आपके भुजाओं को ताकत मिलता है हथेली, कलाई एवं कंधों की मांसपेशियों में अच्छा खिचाव लता है।
  4. पेट एवं पैर की मांसपेशियां भी मजबूत होती है।
  5. यह आसन अस्थमा के लिए लाभप्रद है।
  6. नियमित अभ्यास से रीढ़ से सम्बन्धित समस्यांए दूर होती है।
  7. रीढ़ की हड्डी को मजबूत एवं लचीला बनाता है।
  8. यदि आप कम्प्यूटर पर अधिक कार्य करते है तो यह आसन अवश्य करें।

यह भी पढ़ें: अधोमुखश्वानासन करने की विधि। 

ऊर्ध्व मुख श्वानासन के लिए प्रतिबंध – Restrictions for Urdhva Mukha Svanasana

नीचे बीमारियों की सूची दी गई है, जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें ऊर्ध्व मुख श्वानासन नहीं करना चाहिए।

  1. गठिया रोग हो तो कृपया यह आसन न करें।
  2. उच्च रक्तचाप या हृदय संबंधी बीमारी हो तो यह आसन नहीं करना चाहिए।
  3. गर्भावस्था के दौरान ऊर्ध्व मुख श्वानासन न करें।
  4. पीठ, कंधे, भुजाओं या कलाई में चोट हो तो भी यह आसन नहीं करना चाहिए।
  5. यदि आपके हाथ में झनझनाहट या सुन्न रहता है तो यह आसन न करें।

ऊर्ध्व मुख श्वानासन करने के बाद यह आसन करें – Do these asana after Urdhva Mukha Svanasana

  1. शलभासन
  2. बालासन

शुरुआती लोगों के लिए ऊर्ध्व मुख श्वानासन करने का सर्वश्रेष्ठ सुझाव – Best suggested tips, Urdhva Mukha Svanasana for beginners

यदि आप योगा नियमित नहीं करते हैं तो, आपके शरीर में लचीलापन और शक्ति नहीं रहता है , कई ऐसे आसन होते है जिन्हे करने में आपको तकलीफ महसूस हो सकती है। शुरुआती दौर में इसलिए आपको सरल तरीके से आसन करना चाहिए , इससे आपको सहजता महसूस होगी। ऊर्ध्व मुख श्वानासन एक कठिन आसन है इसलिए अधिक जोर देने से आपके शरीर में दर्द हो सकता है।

  1. पेट के बल जमीन पर मकरासन की मुद्रा में ले जाएँ।
  2. अब अपने हाथों को छाती के पास शरीर के बगल में रखें।
  3. अपने पैरो को सीधा सटाकर रखें पंजे आसमान की ओर होना चाहिए।
  4. साँस लेते हुए ऊपरी धड़ को ऊपर उठायें, भुजाएं सीधी रखें।
  5. सामने की ओर देखें साँस की गति सामान्य रखें।
  6. इस मुद्रा में 5 से 10 सेकेण्ड रहने के बाद साँस छोड़ते धीरे धीरे अपने धड़ को जमीन पर रखें।

क्षमता अनुसार इस आसन को करें यदि आपको सरल तरीका करने में सहजता महसूस न हो तो कृपया आप पहले अन्य सरल आसनों का अभ्यास करें, शरीर में ताकत आने के बाद यह आसन का भी अभ्यास क्र सकते है।

यह भी पढ़ें: Amer Fort of Jaipur

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हलासन

हलासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Steps, Instruction and Halasana benefits in hindi

halasana benefits in hindi

हलासन के बारे में – About Halasana

हलासन दो शब्दों(हल+आसन) से मिलकर बना है। जहां हल का एक ऐसा यंत्र है जो खेती करने के लिए खेतों को जोतने के लिए इस्तेमाल होता है , इस आसन को करते समय आपके शरीर की आकृति हल की तरह होती है इसलिए हलासन कहते है। इसका अंग्रेजी नाम Plow Pose है।

हलासन करने से पहले यह आसन करें – Do these asana before Halasana in hindi

हलासन करने से पहले नीचे दिए गए निम्न योग आसनों को करने की सलाह दी जाती है। इन आसनो को करने से आपके रीढ़ में लचीलापन आता है, तथा आपके पीठ, पेट एवं हाथो एवं गर्दन के मांसपेशियों का तापमान बढ़ता है और उन्हें मजबूत बनाता है , जिससे आपको हलासन करने में आसानी होगी।

  1. सूर्य नमस्कार।
  2. बालासन।
  3. सर्वांगासन।

हलासन करने की विधि – Steps of Halasana

हलासन करने की विधि नीचे दी गयी है, जिसे ध्यानपूर्वक करने से पहले पढ़ें। इससे आपको हलासन करते समय आसानी होगी।यह आसन पीठ के बल लेट कर किया जाता है।

चरण 1- सर्वप्रथम जमीन पर पीठ के बल लेट जाएँ, अपने पैरों को सीधा एवं हाथों को शरीर के बगल में रखें, हथेलियां जमीन की तरफ होनी चाहिए।


चरन 2- अब धीरे-धीरे साँस लेते हुए अपने पैरों को एक साथ ऊपर उठाएं, जब तक कि यह जमीन से लगभग 45 डिग्री न हो जाए, साँस लेने की प्रक्रिया को जारी रखें और पैरों को 90 डिग्री तक उठायें।


चरण 3- साँस छोड़ते हुए अपने कमर एवं पीठ को ऊपर उठाते हुए और पैरों को ऊपरी धड़ के तरफ झुकाएं इस स्थिति में अपने हथेलिओं से पीठ को सहारा दे कोहनी को जमीं पर ही टिकाये रखें।


चरण 4- साँस छोड़ते हुए अपने पैरों की उंगलिओं को सिर के पीछे जमीन पे टिकाएं(ऊपर दी गयी तस्वीर से सहायता ले सकते है), अब अपने हाथ को पीठ से हटाते हुए उन्हें जमीन पर सीधा कर ले हथेलिओं को जमीन की तरफ रखें।


चरण 5- इस स्थिति को 40 से 50 सेकेण्ड तक या क्षमता अनुसार सामान्य स्वांस के साथ बनाये रखें।


चरण 6- वापस जमीन पर आने के लिए अपने हथेलियों से पीठ को सहारा दें और धीरे-धीरे अपने पीठ, नितम्ब और पैरों को जमीन पर रखें। हाथो को सीधा रख ले और शवासन की मुद्रा में आराम करें।

हलासन करते समय ध्यान दें – Pay Attention when doing Halasana

हलासन करते समय आपको नीचे दिए गए निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

  1. दोनों पैरों को साथ ऊपर उठाए।
  2. वापस आते समय जल्दबाजी न करें।
  3. पैरों को आराम से नीचे जमीं पर रखें।

हलासन के फायदे – Halasana benefits in hindi

हलासन के अनेक फायदे जो नीचे निम्नलिखित दिए गए हैं , आपके चेहरे पे निखार लाता है, झुर्रियों को कम करता है, और यह आपके शरीर के कई अंगो को प्रभावित करता है।

  1. यह आसन करने से आपके गर्दन में रक्त प्रवाह होता है, थायराइड के लिए लाभप्रद है।
  2. रीढ़ की हड्डी को लचीला बनता है।
  3. हलासन करने से आँखों की रोशनी बढ़ती है।
  4. चेहरे में चमक आती है और मुंहासे नहीं होते।
  5. पेट और कमर की अतिरिक्त चर्बी को कम करता है।
  6. इस आसन को करने से रक्त संचार ऊपर की ओर होता है जससे हमारा मस्तिष्क विकसित होता है एकाग्रता भी बढ़ती है।
  7. मुधमेह के लिए यह आसन लाभकारी है।
  8. हलासन नियमित करने से बच्चों की लम्बाई बढ़ती है।

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हलासन के लिए प्रतिबंध – Restrictions for Halasana

नीचे बीमारियों की सूची दी गई है, जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें हलासन नहीं करना चाहिए।

  1. यदि आपके कंधे, रीढ़ या पीठ में चोट हो तो यह आसन न करें।
  2. ह्रदय रोग हो तो यह आसन से बचें।
  3. उच्च रक्तचाप वाले लोगो को हलासन नहीं करना चाहिए।
  4. यदि आपको सर्वाइकल या गर्दन में दर्द है, तो आपको इस आसन से बचना चाहिए।

हलासन करने के बाद यह आसन करें – Do these asana after Halasana

  1. मत्स्यासन।
  2. शीर्षासन।
  3. चक्रासन

शुरुआती लोगों के लिए हलासन करने का सर्वश्रेष्ठ सुझाव – Best suggested tips, Halasana for beginners

अगर आप योगा नियमित नहीं करते तो आपके शरीर के कई हिस्से ठीक तरह से काम नहीं करते हैं ,जिससे आपको कोई आसन करने में तकलीफ महसूस होती है। इसलिए आपको सरल तरीके से आसन करना चाहिए , इससे आपको सहजता महसूस होगी। हलासन करने का सरल तरीका निचे दिया गया है।

  1. पीठ के बल जमीन पर लेट जाएँ।
  2. साँस लेते हुए अपने कूल्हे से पैरों को ऊपर उठायें(९०डिग्री), यदि तकलीफ महसूस हो तो आप पैरों को उठाने के लिए हाथों से सहारा ले सकते है।
  3. अब अपने पैरों को सिर की तरफ झुकाएं, हथेलिओं से पीठ को सहारा दे।
  4. सिर के पीछे एक कुर्सी रखें जिसपे आप अपने पैरों को टिका सकते है।
  5. ध्यान दे जितना पैर पीछे की ओर जा सकता है उतना ही ले जाएँ।
  6. क्षमता अनुसार १० से २० सेकेण्ड इस मुद्रा में रहें।
  7. अब धीरे धीरे वापस जमीन पर लेट जाएँ।

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यदि आप हलासन(halasana benefits in hindi) करने की विधि पर लिखे गए लेख को पसंद करते हैं, तो कृपया इसे अपने दोस्तों और परिवार में साझा करें।

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उत्थित पार्श्वकोणासन

उत्थित पार्श्वकोणासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Utthita Parsvakonasana Benefits and Steps

Utthita Parsvakonasana Benefits

उत्थित पार्श्वकोणासन के बारे में – About Utthita Parsvakonasana

उत्थित पार्श्वकोणासन (उत्थित +पार्श्व+ कोण +आसन) यह एक संस्कृत भाषा है, जहाँ ‘उत्थित’ का अर्थ विस्तृत(Extended), ‘पार्श्व’ का अर्थ बगल(Side), ‘कोण’ का अर्थ कोना(Angle ) और ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा(Posture ) से है।अंग्रेजी में इसे एक्सटेंडेड साइड एंगल पोज़(Extended Side Angle Pose) कहते कहते हैं।

उत्थित पार्श्वकोणासन करने से पहले यह आसन करें – Do these asana before Utthita Parsvakonasana

उत्थित पार्श्वकोणासन करने से पहले नीचे दिए गए निम्न योग आसनों को करने की सलाह दी जाती है। इन आसनो को करने से आपके शरीर में लचीलापन आता है, तथा आपके शरीर के मांसपेशियों का तापमान बढ़ाता है।जिससे शरीर में जर्क आने की संभावना नहीं रहती है।

  1. सूर्यनमस्कार
  2. पादहस्तासन। 

उत्थित पार्श्वकोणासन करने की विधि – Utthita Parsvakonasana Steps

उत्थित पार्श्वकोणासन करने की विधि नीचे दी गयी है, जिसे ध्यानपूर्वक करने से पहले पढ़ें। इससे आपको उत्थित पार्श्वकोणासन करते समय आसानी होगी।

  1. सीधे खड़े हो जाएं अब अपने दाएं पैर को दांये पैर से 1. 5 (डेढ़ ) मीटर के अंतर तक फैलाये।
  2. दाहिने पैर को शरीर के दाहिनी ओर मोड़ें ताकि पैर के पंजे शरीर से बहरी तरफ हो।
  3. साँस छोड़ते हुए, दाहिने घुटने को 90 डिग्री मोड़ें और अपने धड़ को आराम से जांघ पर रखें , दाहिने हाथ को दाहिने पैर के बगल में ज़मीन पर रखें।
  4. साँस लेते हुए , बाईं बाह को सर के ऊपर फैलाएं, इस स्थिति में आपका बाइसेप्स बाएं कान को छूना चाहिए अब आप बाएं हाथ की उंगलियों को देखें।
  5. सामान्य साँस ले और एक मिनट के लिए मुद्रा को बनाए रखें।
  6. धीरे-धीरे सांस लें और खड़े हो जाये।
  7. यही प्रक्रिया अब बाएं तरफ से दोहराएं।

उत्थित पार्श्वकोणासन करते समय ध्यान दें – Pay Attention when doing Utthita Parsvakonasana

उत्थित पार्श्वकोणासन करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखें।

  1. ध्यान दे अंतिम स्थिति में, जांघ और पैर के बीच एक समकोण होना चाहिए।
  2. दूसरे घुटने को मोड़ना नहीं चाहिए।
  3. आपकी छाती सामने की तरफ होनी चाहिए ,आगे या पीछे न झुंके।
  4. दोनों पैरों के पंजे पूरी तरह से जमीन के संपर्क में होने चाहिए।

उत्थित पार्श्वकोणासन के संबंधित लेख जरूर पढ़ें: वीरभद्रासन।

उत्थित पार्श्वकोणासन के फायदे – Utthita Parsvakonasana Benefits

उत्थित पार्श्वकोणासन के अनेक फायदे जो नीचे निम्नलिखित दिये गए हैं ।यह आसन करने से आपका शरीर स्वस्थ और पाचन क्रिया ठीक रहती है।।

  1. इसे करने से छाती चौड़ी होती है।
  2. जांघों को मजबूत बनाता है।
  3. कमर दर्द से राहत मिलती है।
  4. आतों के क्रमाकुंचन(peristalsis) को उत्तेजित करता है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है।
  5. यह आसन रोजाना करने से कमर की चर्बी घटती है।
  6. यह आसन मादा में प्रजनन अंग को मजबूत बनता है।
  7. गर्दन संबंधी(स्पोंडिलोसिस) को दूर करता है।

उत्थित पार्श्वकोणासन के लिए प्रतिबंध – Restrictions for Utthita Parsvakonasana

नीचे बीमारियों की सूची दी गई है, जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें उत्थित पार्श्वकोणासन  नहीं करना चाहिए।

  1. हृदय संबंधी समस्याएं हो तो इस आसन को न करें।
  2. यदि आपको सिर दर्द और अनिद्रा की समस्या हो तो इस आसान को न करें।

उत्थित पार्श्वकोणासन करने के बाद यह आसन करें – Do these asana after Utthita Parsvakonasana

  1. त्रिकोणासन
  2. योग निद्रा

शुरुआती लोगों के लिए उत्थित पार्श्वकोणासन करने का सर्वश्रेष्ठ सुझाव – Best suggested tips, Utthita Parsvakonasana for beginners

अगर आप योगा नियमित नहीं करते तो आपके शरीर में अकड़न रहती है जिसकी वजह से आसान करने में तकलीफ महसूस होती है। शुरुआती दौर में इसलिए आपको सरल तरीके से आसन करना चाहिए , इससे आपको सहजता महसूस होगी। उत्थित पार्श्वकोणासन करने का सरल तरीका निचे दिया गया है।

  1. सीधे खड़े हो जाएं अब अपने दाएं पैर को दांये पैर से 1. 5 (डेढ़ ) मीटर के अंतर तक फैलाये।
  2. दाहिने पैर को शरीर के दाहिनी ओर मोड़ें ताकि पैर के पंजे शरीर से बहरी तरफ हो।
  3. साँस छोड़ते हुए, दाहिने घुटने को 90 डिग्री मोड़ें और अपने दाहिने हाथ को कोहनी के पास से मोड़ कर दाहिने जांघ पर रखें।
  4. साँस लेते हुए अपने बाईं बांह को ऊपर उठाये , अपने हाथ को उँगलियों को छत की तरफ रखे।
  5. अब आप बाएं हाथ की उंगलियों को देखें।
  6. यदि आपको ऊपर देखने में तकलीफ महसूस हो रही हो तो आप अपनी गर्दन सीधी रख सकते हैं।
  7. सामान्य साँस ले और अपनी क्षमता अनुसार इस मुद्रा को बनाए रखें।
  8. धीरे-धीरे सांस लें और खड़े हो जाये।
  9. यही प्रक्रिया अब बाएं तरफ से दोहराएं।

यदि आप प्रतिदिन इस आसन का अभ्यास करते हैं, तो आपका शरीर लचीला और मजबूत होगा जिससे आपको कठिन से कठिन आसनों को करने में सहजता महसूस होगी।

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पश्चिमोत्तानासन

पश्चिमोत्तानासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Steps and Benefits of Paschimottanasana in Hindi

Benefits of Paschimottanasana in Hindi

पश्चिमोत्तानासन के बारे में – About Paschimottanasana

पश्चिमोत्तानासन एक संस्कृत भाषा है, जो तीन शब्द से मिलकर बना हैं, ‘पश्चिम’ का अर्थ है पीछे, ‘उत्तान’ का अर्थ है खिंचाव और ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा से है। इस आसन को करते समय आपके पीछे यानि पीठ में खिंचाव आता है इसलिए इसे पश्चिमोत्तानासन कहते है।

पश्चिमोत्तानासन करने से पहले यह आसन करें – Do these asana before Paschimottanasana

पश्चिमोत्तानासन करने से पहले नीचे दिए गए निम्न योग आसनों को करने की सलाह दी जाती है। इन आसनो को करने से आपके शरीर में लचीलापन आता है, तथा आपके पैरों एवं हाथो के मांसपेशियों का तापमान बढ़ाता है और उन्हें लचीला बनाता है , जिससे आपको पश्चिमोत्तानासन करने में आसानी होगी।

  1. वज्रासन।
  2. शशांकासन।
  3. अर्ध मत्स्येन्द्रासन।

पश्चिमोत्तानासन करने की विधि – Paschimottanasana Steps

पश्चिमोत्तानासन करने की विधि नीचे दी गयी है, जिसे ध्यानपूर्वक करने से पहले पढ़ें। इससे आपको पश्चिमोत्तानासन करते समय आसानी होगी।यह आसन बैठकर किया जाने वाला है।

चरण 1- अपने पैरों को बाहर की तरफ फैलाकर बैठ जाएँ ,हाथों को शरीर के बगल में रखें।

चरण 2- साँस लेते हुए अपने हाथो को ऊपर उठाये, हाथो को बिल्कुल सीधा रखें कंधे से हाथों को ऊपर की ओर खीचें, कमर सीधी रखें।

चरण 3- साँस छोड़ते हुए निचली कमर से आगे की और झुकें, ध्यान दें आगे झुकते समय आपके हाथ और सिर दोनों साथ होने चाहिए।

चरण 4- अपने पैर के अंगूठे को या पैरों पंजे को हाथों से पकड़ें और अपनी नाक को घुटने पर रखें। इस स्थिति को 1 मिनट या क्षमता अनुसार बनाये रखें।

चरण 5- अब आप अपने पैरों के अंगूठे को छोड़ें और साँस लेते हुए सीधा बैठ जाएँ।

जरूर पढ़ें: उत्थित पार्श्वकोणासन

पश्चिमोत्तानासन करते समय ध्यान दें – Pay Attention when doing Paschimottanasana

पश्चिमोत्तानासन करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखें।

इस आसन को करते समय ध्यान रखें घुटने को मुड़ने न दें।

पश्चिमोत्तानासन के फायदे – Benefits of Paschimottanasana in Hindi

पश्चिमोत्तानासन के अनेक फायदे जो नीचे निम्नलिखित दिये गए हैं ।

  1. कब्ज़ से राहत मिलती है।
  2. आपके रीढ़ को लचीला बनाने में मदद करता है।
  3. आपके पाचन क्रिया में सुधार होता है और आपके शरीर को ऊर्जा मिलती है।
  4. रीढ़ की हड्डी और पीठ की मांसपेशियों को उत्तेजित करता है।
  5. रजोनिवृत्ति और मासिक धर्म की समस्यांओं को दूर करता है।
  6. पश्चिमोत्तानासन आपके पेट की चर्बी को घटाता है।
  7. मधुमेह के रोकथाम के लिए यह आसन लाभकारी है।
  8. यह आसन तनाव को कम करने में मदद करता है।

यह भी पढ़ें: अर्धचंद्रासन

पश्चिमोत्तानासन के लिए प्रतिबंध – Restrictions for Paschimottanasana

नीचे बीमारियों की सूची दी गई है, जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें पश्चिमोत्तानासन नहीं करना चाहिए।

  1. यदि आपको दिल से संबंधित कोई बीमारी हो तो इस आसन को न करें।
  2. पीठ की समस्या हो तो इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  3. यदि आपको स्पोंडिलोसिस या साइटिका हो तो इस आसन से बचें।
  4. पेट में अल्सर हो तो इस आसन को न करें।
  5. गर्भावस्था के दौरान इसे नहीं करना चाहिए।

पश्चिमोत्तानासन करने के बाद यह आसन करें – Do these asana after Paschimottanasana

  1. उष्ट्रासन।
  2. वक्रासन।
  3. सुप्त वज्रासन।

शुरुआती लोगों के लिए पश्चिमोत्तानासन करने का सर्वश्रेष्ठ सुझाव – Best suggested tips, Paschimottanasana for beginners

यदि आप योगा नियमित नहीं करते हैं तो, आपके शरीर में अकड़न रहती है जिसकी वजह से आसन करने में तकलीफ महसूस हो सकती है। शुरुआती दौर में इसलिए आपको सरल तरीके से आसन करना चाहिए , इससे आपको सहजता महसूस होगी।

  1. अपने पैरों को बाहर की तरफ फैलाकर बैठ जाएँ ,हाथों को शरीर के बगल में रखें।
  2. अब आप साँस लेते हुए अपने हाथो को ऊपर उठाये, हाथो को बिल्कुल सीधा रखें।
  3. साँस छोड़ते हुए आगे की और झुकें यदि आपको पैर के अंगूठे को छूने में तकलीफ महसूस हो तो जितना आगे झुक सकते है उतना ही आगे झुकें , अधिक खिचाव देने से आपके पीठ में दर्द हो सकता है।
  4. साँस लेते हुए हाथों और सिर को ऊपर करें , यह प्रक्रिया 3 से 5 बार दोहराएं।
  5. जब आपके रीढ़ में लचीलापन आ जाये तब आप ज्यादा झुक सकते है।

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