अर्धचंद्रासन

अर्धचंद्रासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Ardha Chandrasana Benefits, Step & Instruction in hindi

ardha chandrasana benefits

अर्धचंद्रासन के बारे में – About Ardha Chandrasana

अर्धचंद्रासन(अर्ध+चंद्र+आसन) एक संस्कृत भाषा है। जहाँ ‘अर्ध’ का अर्थ आधा(half) और ‘चंद्र’ का अर्थ चन्द्रमा(moon) , ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा(pose) से है। इस आसन को करते समय शरीर का आकार आधे चन्द्रमा की जैसी होती है, इसलिए इसे अर्धचन्द्रासन कहते है। अर्धचन्द्रासन को अंग्रेजी नाम Half Moon Pose है।

अर्धचंद्रासन करने से पहले यह आसन करें – Do these asana before Ardha Chandrasana

अर्धचंद्रासन करने से पहले नीचे दिए गए निम्न योग आसनों को करने की सलाह दी जाती है। इन आसनो को करने से आपके शरीर में लचीलापन आता है, तथा आपके शरीर के मांसपेशियों का तापमान को बढ़ाता।जिससे शरीर में जर्क आने की संभावना नहीं रहती है।

  1. सूर्य नमस्कार
  2. पादहस्तासन

अर्धचंद्रासन करने की विधि – Ardha Chandrasana Steps

अर्धचंद्रासन करने की विधि नीचे दी गयी है, जिसे ध्यानपूर्वक करने से पहले पढ़ें, इससे आपको अर्धचंद्रासन करते समय आसानी होगी।यह आसन खड़े होकर किया जाता है।

चरण 1- ताड़ासन में खड़े हो जाये ,अब अपने हाथों को कमर पे रखते हुए पैरों को इस तरह फैलाएं की उनके बीच 4 फीट का अंतर हो और ध्यान दे आपका रीढ़ और गर्दन सीधी हो।

चरण 2- साँस लेते हुए अपने दोनों हाथों को बगल से कंधे के सीध(90 डिग्री ) तक उठाये, अब आप दांयी तरफ झुकें और दांये हाथ को जमीन पर रखे।

चरण 3- अब आप अपने बाएं पैर को उठाए ध्यान दे आपका बायाँ पैर जमीन से 90 डिग्री कमर की सीध में होना चाहिए इस स्थिति में आपका बायां हाथ ऊपर छत की ओर सीधा रखें।इस स्थिति को 30 से 40 सेकेण्ड तक बनाये रखे सामान्य श्वांस लें ।

चरण 4- धीरे -धीरे साँस लेते हुए खड़े हो जाये और हाथों को नीचे कर ताड़ासन में खड़े हो जाएँ।

यही प्रक्रिया अब बांयी तरफ से करे।

अर्धचंद्रासन के संबंधित लेख जरूर पढ़ें: त्रिकोणासन के फायदे ।

अर्धचंद्रासन करते समय ध्यान दें – Pay Attention when doing Ardha Chandrasana

अर्धचंद्रासन करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखें।

  1. यदि आपके गर्दन में दर्द हो तो गैर्न ऊपर न करें।
  2. ध्यान दे जब आप 3 चरण में हो तो आपका घुटना न मुड़े।

अर्धचंद्रासन के फायदे – Ardha Chandrasana Benefits

अर्धचंद्रासन के अनेक फायदे जो नीचे निम्नलिखित दिये गए हैं ।यह आसन करने से आपके शरीर में अच्छा खिचाव आता है, शरीर स्वस्थ और मन शांत रहता है।

  1. पाचन में सुधार करता है।
  2. माइग्रेन या डायरिया जैसी बीमारियों से छुटकारा दिलाता है।
  3. यह आसन करने से तनाव नहीं रहता और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
  4. लो ब्लड प्रेशर(low blood pressure) या नींद न आना जैसी बीमारी से राहत।
  5. चिंता,चक्कर आना जैसी बीमारी है तो अर्धचन्द्रासन करने से राहत मिलती है।
  6. पेट,एड़ी,जांघों, नितम्ब और रीढ़ को मजबूत करता है।

यह भी पढ़ें:शशांकासन

अर्धचंद्रासन के लिए प्रतिबंध – Restrictions for Ardha Chandrasana

नीचे बीमारियों की सूची दी गई है, जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें अर्धचंद्रासन नहीं करना चाहिए।

  1. यदि आपके पीठ या कमर में दर्द हो तो इस आसन को न करें।

अर्धचंद्रासन करने के बाद यह आसन करें – Do these asana after Ardha Chandrasana

  1. वीरभद्रासन 1।
  2. उत्थित पार्श्वकोणासन
  3. योग निद्रा।

शुरुआती लोगों के लिए अर्धचंद्रासन करने का सर्वश्रेष्ठ सुझाव – Best suggested tips, Ardha Chandrasana Steps for beginners

अगर आप योगा नियमित नहीं करते हैं तो आपके शरीर के कई अंग ठीक तरह से काम नहीं करते हैं ,जिससे आपको कोई आसन करने में तकलीफ महसूस हो सकती है। इसलिए आपको सरल तरीके से आसन करना चाहिए , इससे आपको सहजता महसूस होगी। अर्धचंद्रासन करने का सरल तरीका निचे दिया गया है।

  1. ताड़ासन स्थिति में खड़े हो जाएं अब अपने दोनों पैरों के बिच ४फ़िट का अंतर बनाकर खड़े हो जाये।
  2. अपने हाथों को ऊपर उठाये , आपके हाथ आपके कधों के सीध हो होना चाहिए।
  3. धीरे -धीरे दांयी और झुकें और अपने दांये पैर को घुटनो से थोड़ा मोड़ें अब अपनी दांयी हथेली जमीं पे रखें और बायां हाथ ऊपर की ओर करे।
  4. बाएं पैर को ऊपर उठाएं और उसे धड़ के सीध में लाएं। यदि आप अपने दाएं हाथ को जमीन पे रखने में तकलीफ महसूस करें तो उसे कुर्सी या ब्लॉक का सहारा दे सकते है

अपनी क्षमता अनुसार झुके ज्यादा खिंचाव न दे, यदि इस आसन को आप पहली बार कर रहे है तो योग प्रशिक्षक की सलाह ले।

यह भी पढ़ें: Practice Quantitative Aptitude Questions

यदि आप अर्धचंद्रासन के लाभ (Ardha Chandrasana Benefits) पर लिखे गए लेख को पसंद करते हैं, तो कृपया इसे अपने दोस्तों और परिवार में साझा करें।

सम्बंधित आसन
  • Mountain Pose
  • Low Lunge
  • Lord of the Dance Pose
  • Intense Side Stretch Pose
  • अर्धचंद्रासन
    अर्धचंद्रासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Ardha Chandrasana Benefits, Step & Instruction in hindi अर्धचंद्रासन के बारे में – About Ardha Chandrasana अर्धचंद्रासन(अर्ध+चंद्र+आसन) एक संस्कृत भाषा है। जहाँ ‘अर्ध’ का अर्थ आधा(half) और ‘चंद्र’ का अर्थ चन्द्रमा(moon) , … Read more
  • Gate Pose

त्रिकोणासन

त्रिकोणासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Step, Instruction and Benefits of Trikonasana in hindi

Benefits of Trikonasana

त्रिकोणासन के बारे में – About Trikonasana

त्रिकोणासन संस्कृत भाषा के दो शब्दों (त्रिकोण + आसन) से मिलकर बना है।’त्रिकोण’ का मतलब तीन कोने और ‘आसन’ का मतलब स्थिति। इस योगासन में शरीर का आकर त्रिकोण की तरह होता है,इसीलिए इसे त्रिकोणासन कहते हैं। इस आसन को उत्थिता त्रिकोणासन के नाम से भी जाना जाता है ।इंग्लिश में Extended Triangle Pose or Triangle Pose के नाम से भी जाना जाता है।

त्रिकोणासन करने से पहले यह आसन करें – Do these asana before Trikonasana

त्रिकोणासन करने से पहले नीचे दिए गए निम्न योग आसनों को करने की सलाह दी जाती है। इन आसनो को करने से आपके शरीर में लचीलापन आता है, तथा आपके शरीर के मांसपेशियों का तापमान को बढ़ाता।जिससे शरीर में जर्क आने की संभावना नहीं रहती है।

  1. सूक्ष्म व्यायाम करें।
  2. सूर्यनमस्कार २ से ४ बार।
  3. पादहस्तासन

त्रिकोणासन करने की विधि – Trikonasana Steps

त्रिकोणासन करने की विधि नीचे दी गयी है, जिसे ध्यानपूर्वक करने से पहले पढ़ें। इससे आपको त्रिकोणासन करते समय आसानी होगी।

चरण 1 – ताड़ासन में खड़े हो जाएँ , अब अपने पैरों को इस तरह फैलाएं की दोनों पैरों के बीच १ मीटर का अंतर हो।

चरण 2 – साँस लेते हुए अपने दोनों हाथों को बगल से उठाएं , आपके दोनों हाथ(90 डिग्री पे) कंधे के सीध में होनी चाहिए और हथेलियां नीचे जमीन की तरफ रखें।

चरण 3 – धीरे – धीरे दायीं तरफ झुके और दाएं हाथ से टखने(Ankle) को छूने की कोशिश करे।

चरण 4 – दायीं तरफ झुकते समय अपने घुटनों को सीधा रखें उसपे कोई भर न दे।

चरण 5 – इस स्थिति आपका बायां हाथ ऊपर छत की तरफ होना चाहिए, हथेली सामने और उंगलिया सीधी रखें।

चरण 6 – अब आप अपनी गर्दन बाईं ओर करें और बाएं हाथ की मध्य वाली ऊँगली(middle finger) को देखें।

चरण 7 – इस स्थिति में 1 मिनट या अपनी क्षमता के अनुसार रहें, सामान्य साँस ले(normal breathing)।

चरण 8 – धीरे – धीरे सांस लेते हुए खड़े हो जाएँ और हांथो को नीचे कर ताड़ासन में आ जाएँ।

अब यही प्रक्रिया बाएं तरफ करें।

२ से ३ बार इस आसन को दोहराएं।

त्रिकोणासन के संबंधित लेख जरूर पढ़ें: पार्श्वकोणासन करने का तरीका और फायदे।

त्रिकोणासन करते समय ध्यान दें – Pay Attention when doing Trikonasana

त्रिकोणासन करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखें।

  1. कभी भी अपने घुटनों को मोड़ें नहीं।
  2. अपने हाथों को सीधा रखें, कोहनी और उंगलियां सीधी होनी चाहिए।
  3. जमीन पे हाथ रखते समय आगे या पीछे की ओर न झुके।

त्रिकोणासन के फायदे – Benefits of Trikonasana in hindi

त्रिकोणासन के अनेक फायदे जो नीचे निम्नलिखित दिये गए हैं ।यह आसन करने से आपका शरीर स्वस्थ और मांसपेशियां मजबूत होती है।

  1. फ्लैट पैर को रोकने में मदद करता है।
  2. पिंडली(calf) की मांसपेशियों और जांघ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
  3. इसे करने से आपकी पीठ वक्र(curve) जैसी होती है।
  4. कमर की मांसपेशियों को मजबूत करता है और रीढ़ को लचीला बनाता है।
  5. यदि बच्चे इस आसन को नियमित करें तो बच्चों की लम्बाई बढ़ती है।
  6. कमर के पास की चर्बी घटती है।

यह भी पढ़ें:पादहस्तासन

त्रिकोणासन के लिए प्रतिबंध – Restrictions for Trikonasana(Triangle pose)

नीचे बीमारियों की सूची दी गई है, जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें त्रिकोणासन नहीं करना चाहिए।

  1. जिनका हाल ही में पेट की सर्जरी हुई हो।
  2. स्लिप डिस्क और साइटिका हो तो इसे न करें।
  3. सिर चकराना, कम रक्तचाप(low blood pressure) वाले लोग इस आसन को न करें।

त्रिकोणासन करने के बाद यह आसन करें – Do these asana after Trikonasana

  1. अर्ध चंद्रासन
  2. योग निद्रा

शुरुआती लोगों के लिए त्रिकोणासन करने का सर्वश्रेष्ठ सुझाव – Best suggested tips, Trikonasana for beginners

अगर आप योगा नियमित नहीं करते तो आपके शरीर के कई हिस्से ठीक तरह से काम नहीं करते हैं ,जिससे आपको कोई आसन करने में तकलीफ महसूस होती है। इसलिए आपको सरल तरीके से आसन करना चाहिए , इससे आपको सहजता महसूस होगी। त्रिकोणासन करने का सरल तरीका निचे दिया गया है।

  1. ताड़ासन में खड़े हो जाएँ , अब अपने पैरों को क्षमता अनुसार फैलाएं।
  2. साँस लेते हुए अपने दोनों हाथों को बगल से उठाएं , आपके दोनों हाथ(90 डिग्री पे) कंधे के सीध में होनी चाहिए और हथेलियां नीचे जमीन की तरफ रखें।
  3. धीरे – धीरे दायीं तरफ झुके और दाएं हाथ से घुटने को छूने की कोशिश करे, झुकने में तकलीफ हो रही हो तो जितना झुक सकते उतना ही झुके।
  4. इस स्थिति आपका बायां हाथ ऊपर छत की तरफ होना चाहिए, हथेली सामने और उंगलिया सीधी रखें।
  5. अब आप अपनी गर्दन बाईं ओर करें और बाएं हाथ की मध्य वाली ऊँगली(middle finger) को देखें,यदि आप को गर्दन में या ऊपर की ओर देखने में तकलीफ हो तो अपनी गर्दन सामान्य रूप से रखें।
  6. अपनी क्षमता के अनुसार इस स्थिति में रहें सामान्य साँस ले(normal breathing)।
  7. अब यही प्रक्रिया बाएं तरफ करें।

यह भी पढ़ें: Practice Email Writing For Competative Exams

यदि आप त्रिकोणासन पर लिखे गए लेख को पसंद करते हैं, तो कृपया इसे अपने दोस्तों और परिवार में साझा करें।

सम्बंधित आसन
  • Mountain Pose
  • Low Lunge
  • Lord of the Dance Pose
  • Intense Side Stretch Pose
  • अर्धचंद्रासन
    अर्धचंद्रासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Ardha Chandrasana Benefits, Step & Instruction in hindi अर्धचंद्रासन के बारे में – About Ardha Chandrasana अर्धचंद्रासन(अर्ध+चंद्र+आसन) एक संस्कृत भाषा है। जहाँ ‘अर्ध’ का अर्थ आधा(half) और ‘चंद्र’ का अर्थ चन्द्रमा(moon) , … Read more
  • Gate Pose

उत्थित पार्श्वकोणासन

उत्थित पार्श्वकोणासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Utthita Parsvakonasana Benefits and Steps

Utthita Parsvakonasana Benefits

उत्थित पार्श्वकोणासन के बारे में – About Utthita Parsvakonasana

उत्थित पार्श्वकोणासन (उत्थित +पार्श्व+ कोण +आसन) यह एक संस्कृत भाषा है, जहाँ ‘उत्थित’ का अर्थ विस्तृत(Extended), ‘पार्श्व’ का अर्थ बगल(Side), ‘कोण’ का अर्थ कोना(Angle ) और ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा(Posture ) से है।अंग्रेजी में इसे एक्सटेंडेड साइड एंगल पोज़(Extended Side Angle Pose) कहते कहते हैं।

उत्थित पार्श्वकोणासन करने से पहले यह आसन करें – Do these asana before Utthita Parsvakonasana

उत्थित पार्श्वकोणासन करने से पहले नीचे दिए गए निम्न योग आसनों को करने की सलाह दी जाती है। इन आसनो को करने से आपके शरीर में लचीलापन आता है, तथा आपके शरीर के मांसपेशियों का तापमान बढ़ाता है।जिससे शरीर में जर्क आने की संभावना नहीं रहती है।

  1. सूर्यनमस्कार
  2. पादहस्तासन। 

उत्थित पार्श्वकोणासन करने की विधि – Utthita Parsvakonasana Steps

उत्थित पार्श्वकोणासन करने की विधि नीचे दी गयी है, जिसे ध्यानपूर्वक करने से पहले पढ़ें। इससे आपको उत्थित पार्श्वकोणासन करते समय आसानी होगी।

  1. सीधे खड़े हो जाएं अब अपने दाएं पैर को दांये पैर से 1. 5 (डेढ़ ) मीटर के अंतर तक फैलाये।
  2. दाहिने पैर को शरीर के दाहिनी ओर मोड़ें ताकि पैर के पंजे शरीर से बहरी तरफ हो।
  3. साँस छोड़ते हुए, दाहिने घुटने को 90 डिग्री मोड़ें और अपने धड़ को आराम से जांघ पर रखें , दाहिने हाथ को दाहिने पैर के बगल में ज़मीन पर रखें।
  4. साँस लेते हुए , बाईं बाह को सर के ऊपर फैलाएं, इस स्थिति में आपका बाइसेप्स बाएं कान को छूना चाहिए अब आप बाएं हाथ की उंगलियों को देखें।
  5. सामान्य साँस ले और एक मिनट के लिए मुद्रा को बनाए रखें।
  6. धीरे-धीरे सांस लें और खड़े हो जाये।
  7. यही प्रक्रिया अब बाएं तरफ से दोहराएं।

उत्थित पार्श्वकोणासन करते समय ध्यान दें – Pay Attention when doing Utthita Parsvakonasana

उत्थित पार्श्वकोणासन करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखें।

  1. ध्यान दे अंतिम स्थिति में, जांघ और पैर के बीच एक समकोण होना चाहिए।
  2. दूसरे घुटने को मोड़ना नहीं चाहिए।
  3. आपकी छाती सामने की तरफ होनी चाहिए ,आगे या पीछे न झुंके।
  4. दोनों पैरों के पंजे पूरी तरह से जमीन के संपर्क में होने चाहिए।

उत्थित पार्श्वकोणासन के संबंधित लेख जरूर पढ़ें: वीरभद्रासन।

उत्थित पार्श्वकोणासन के फायदे – Utthita Parsvakonasana Benefits

उत्थित पार्श्वकोणासन के अनेक फायदे जो नीचे निम्नलिखित दिये गए हैं ।यह आसन करने से आपका शरीर स्वस्थ और पाचन क्रिया ठीक रहती है।।

  1. इसे करने से छाती चौड़ी होती है।
  2. जांघों को मजबूत बनाता है।
  3. कमर दर्द से राहत मिलती है।
  4. आतों के क्रमाकुंचन(peristalsis) को उत्तेजित करता है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है।
  5. यह आसन रोजाना करने से कमर की चर्बी घटती है।
  6. यह आसन मादा में प्रजनन अंग को मजबूत बनता है।
  7. गर्दन संबंधी(स्पोंडिलोसिस) को दूर करता है।

उत्थित पार्श्वकोणासन के लिए प्रतिबंध – Restrictions for Utthita Parsvakonasana

नीचे बीमारियों की सूची दी गई है, जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें उत्थित पार्श्वकोणासन  नहीं करना चाहिए।

  1. हृदय संबंधी समस्याएं हो तो इस आसन को न करें।
  2. यदि आपको सिर दर्द और अनिद्रा की समस्या हो तो इस आसान को न करें।

उत्थित पार्श्वकोणासन करने के बाद यह आसन करें – Do these asana after Utthita Parsvakonasana

  1. त्रिकोणासन
  2. योग निद्रा

शुरुआती लोगों के लिए उत्थित पार्श्वकोणासन करने का सर्वश्रेष्ठ सुझाव – Best suggested tips, Utthita Parsvakonasana for beginners

अगर आप योगा नियमित नहीं करते तो आपके शरीर में अकड़न रहती है जिसकी वजह से आसान करने में तकलीफ महसूस होती है। शुरुआती दौर में इसलिए आपको सरल तरीके से आसन करना चाहिए , इससे आपको सहजता महसूस होगी। उत्थित पार्श्वकोणासन करने का सरल तरीका निचे दिया गया है।

  1. सीधे खड़े हो जाएं अब अपने दाएं पैर को दांये पैर से 1. 5 (डेढ़ ) मीटर के अंतर तक फैलाये।
  2. दाहिने पैर को शरीर के दाहिनी ओर मोड़ें ताकि पैर के पंजे शरीर से बहरी तरफ हो।
  3. साँस छोड़ते हुए, दाहिने घुटने को 90 डिग्री मोड़ें और अपने दाहिने हाथ को कोहनी के पास से मोड़ कर दाहिने जांघ पर रखें।
  4. साँस लेते हुए अपने बाईं बांह को ऊपर उठाये , अपने हाथ को उँगलियों को छत की तरफ रखे।
  5. अब आप बाएं हाथ की उंगलियों को देखें।
  6. यदि आपको ऊपर देखने में तकलीफ महसूस हो रही हो तो आप अपनी गर्दन सीधी रख सकते हैं।
  7. सामान्य साँस ले और अपनी क्षमता अनुसार इस मुद्रा को बनाए रखें।
  8. धीरे-धीरे सांस लें और खड़े हो जाये।
  9. यही प्रक्रिया अब बाएं तरफ से दोहराएं।

यदि आप प्रतिदिन इस आसन का अभ्यास करते हैं, तो आपका शरीर लचीला और मजबूत होगा जिससे आपको कठिन से कठिन आसनों को करने में सहजता महसूस होगी।

यह भी पढ़ें: All Government Job Syllabus

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Step, Instruction and Benefits of Utthita Hasta Padangusthasana in hindi

utthita hasta padangusthasana

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन के बारे में – About Utthita Hasta Padangusthasana

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन (उत्थित +हस्त+ पद+अंगुष्ठासन+आसन) यह एक संस्कृत भाषा है, जहाँ ‘उत्थित’ का अर्थ विस्तृत(Extended), ‘हस्त’ का अर्थ हाथ (hand), ‘पद’ का अर्थ पैर(foot) ‘अङ्गुष्ठासन’ का अर्थ अंगूठा (toe ) और ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा(Posture ) से है।अंग्रेजी में इसे एक्सटेंडेड हैंड टू बिग टो पोज़(Extended-Hand -to -Big -Toe -Pose ) कहते कहते हैं।

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन करने से पहले यह आसन करें – Do these asana before Utthita Hasta Padangusthasana

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन करने से पहले नीचे दिए गए निम्न योग आसनों को करने की सलाह दी जाती है। इन आसनो को करने से आपके शरीर में लचीलापन आता है, तथा आपके शरीर के मांसपेशियों का तापमान को बढ़ाता।जिससे शरीर में जर्क आने की संभावना नहीं रहती है।

  1. सूर्य नमस्कार
  2. त्रिकोणासन

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन करने की विधि – Utthita Hasta Padangusthasana Steps

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन करने की विधि नीचे दी गयी है, जिसे ध्यानपूर्वक करने से पहले पढ़ें। इससे आपको उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन करते समय आसानी होगी।

चरण 1- दोनों पैरों को साथ रखकर ताड़ासन में खड़े हो जाएं और हथिलियों को कमर पर रखें ।

चरण 2- अब आप दाहिने पैर को घुटने के पास से मोड़ें ,आपका घुटना छाती के पास और जांघ पेट क पास होना चाहिए।

चरण 3- साँस लेते हुए अपने दाहिने हाथ से मुड़े हुए पैर के अंगूठे को पकड़े और पैर को सामने की ओर सीधा करें।

चरण 4- अब साँस छोड़ते हुए आप धीरे-धीरे दाएं पैर को कूल्हे से घूमाते हुए शरीर के बाहरी हिस्से (दाहिने) की ओर ले जाएं, आपका पैर 90 डिग्री पे होना चाहिए, अब अपनी गर्दन बायीं ओर घुमाएं और अपने बाएं कंधे पे ध्यान( फोकस) लगाएं।इस स्थिति में आप 1 मिनट तक या क्षमता अनुसार रहे।

चरण 5- अब साँस लेते हुए अपनी गर्दन और पैर सामने की ओर लाएं ,दाएं पैर के अंगूठे से हाथ हटाते हुए पैर को घुटने क पास से मोड़ें और जमीन पे रखें।

अब इस प्रक्रिया को बाएं तरफ से दोहराएं।

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन करते समय ध्यान दें – Pay Attention when doing Utthita Hasta Padangusthasana

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखें।

  1. यह आसन करते समय आपका पैर सीधा होना चाहिए।
  2. संतुलन बनाने के लिए ध्यान लगाए।

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन के फायदे – Benefits of Utthita Hasta Padangusthasana

  1. एक पैर पे खड़ा होने से संतुलित क्षमता भी बढ़ती है।
  2. पैर, एड़ी, घुटनों और जांघ की खिंचाव होता है,जिससे ये मजबूत होते है।
  3. एकाग्रता और सहनशीलता बढ़ती है।

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन के लिए प्रतिबंध – Restrictions for Utthita Hasta Padangusthasana

नीचे बीमारियों की सूची दी गई है, जो लोग इन बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन नहीं करना चाहिए।

  1. कमर की निचले हिस्से में या एड़ियों में दर्द हो तो इस आसन को न करे।

उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन करने के बाद यह आसन करें – Do these asana after Utthita Hasta Padangusthasana

  1. पादहस्तासन
  2. योग निद्रा

शुरुआती लोगों के लिए उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन करने का सर्वश्रेष्ठ सुझाव – Best suggested tips, Utthita Hasta Padangusthasana for beginners

अगर आप योगा नियमित नहीं करते तो आपके शरीर के कई हिस्से ठीक तरह से काम नहीं करते हैं ,जिससे आपको कोई आसन करने में तकलीफ महसूस होती है। इसलिए आपको सरल तरीके से आसन करना चाहिए , इससे आपको सहजता महसूस होगी। उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन थोड़ा कठिन आसन है इसको करने का सरल तरीका निचे दिया गया है।

  1. दोनों पैरों को साथ रखकर जमीन पे खड़े हो जाएं और हथिलियों को कमर पर रखें ।
  2. खड़े होने के लिए दीवाल का सहारा ले सकते है।
  3. आप अपने दाएं पैर को घुटने से मोड़ कर दांये हाथ से पैर के पंजे को पकडे और पैर को सामने की ओर सीधा करें,यदि आपको पैर सीधा करने में तकलीफ हो तो आप एक कपडा या दुपट्टा ले और उसे पंजे पे फसा कर दुपट्टे को हाथ से पकडे।
  4. आपका पैर 90 डिग्री पे होना चाहिए।इस स्थिति में आप अपना पैर कुर्सी पर भी रख सकते हैं।
  5. इस स्थिति में आप 30 सेकेंड या क्षमता अनुसार रहे।
  6. इस प्रक्रिया को अब बाएं तरफ से दोहराएं।

कुछ दिनों तक इसका अभ्यास इसी तरह करे , जब आपका संतुलन बनने लगे तब आप इसका कठिन आसन करे जो ऊपर दिया गया है।

यह भी पढ़ें: ipl match Schedule

यदि आप उत्थित हस्त पाद अंगुष्ठासन(utthita hasta padangusthasana) पर लिखे गए लेख को पसंद करते हैं, तो कृपया इसे अपने दोस्तों और परिवार में साझा करें।

सम्बंधित आसन
  • Mountain Pose
  • Low Lunge
  • Lord of the Dance Pose
  • Intense Side Stretch Pose
  • अर्धचंद्रासन
    अर्धचंद्रासन करने की विधि, निर्देश, और लाभ – Ardha Chandrasana Benefits, Step & Instruction in hindi अर्धचंद्रासन के बारे में – About Ardha Chandrasana अर्धचंद्रासन(अर्ध+चंद्र+आसन) एक संस्कृत भाषा है। जहाँ ‘अर्ध’ का अर्थ आधा(half) और ‘चंद्र’ का अर्थ चन्द्रमा(moon) , … Read more
  • Gate Pose